Nov 15, 2016

सरकार की नोटबंदी से कटी बैंक कैशियर्स की जेब

धीरज तिवारी, नई दिल्ली
सरकार की महत्वाकांक्षी डी-मॉनेटाइजेशन स्कीम में शामिल बैंक एंप्लॉयीज में सबसे अधिक प्रभावित वर्ग में से एक बैंकों के कैशियर्स हैं।


कई बैंक ऑफिसर्स के मुताबिक कैशियर्स को अपने अकाउंट्स सेटल करते वक्त रोजाना आधार पर अपनी सैलरी में कम से कम 2,000 रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकारी बैंक के एक कैशियर ने बताया, ‘यह बड़ा ऑपरेशन है। हम एक दिन में कम से कम 1.35 करोड़ रुपये की करेंसी एक्सचेंज कर रहे हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि डिपॉजिट से ज्यादा पैसे निकल जाते हैं।’ इस अमाउंट को हमारी सैलरी से काट लिया जाता है।

एक दूसरे कैशियर ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि पिछले तीन दिनों में अकाउंट्स मेल न खाने के कारण वह 3,000 रुपये अपनी जेब से दे चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘यह पैसा मेरी खुद की जेब से जा रहा है।’ सरकार ने बैंकों से कहा है कि करेंसी एक्सचेंज फैसिलिटी वन टाइम ऑप्शन है। एक दूसरे सरकारी बैंक में काम कर रहे कैशियर ने बताया कि सरकार को तत्काल आधार पर करेंसी एक्सचेंज फैसिलिटी को रोक देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘यह और कुछ नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग है। 4,500 रुपये तक के नए करेंसी नोट्स पाने के लिए पांच साल के बच्चे भी आधार कार्ड के साथ लाइन लगा रहे हैं।’इकनॉमिक टाइम्स ने जिन बैंक ऑफिसर्स ने बातचीत की, उनमें से ज्यादातर इससे सहमत दिखे। केंद्र ने अब इलेक्शन में फर्जी वोटिंग को रोकने में इस्तेमाल आने वाली स्याही का उपयोग करेंसी एक्सचेंज करने की प्रक्रिया में करने का फैसला किया है।

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