नई दिल्ली। देश में बढ़ते पेट्रोल-डीजल
के दामों से अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भारत ने एक ऐसी
तकनीक विकसित की है जिससे काफी कम दामों में पेट्रोल और डीजल मिल सकेगा।
भारतीय शोधकर्ताओ ने प्लास्टिक के कूड़े से निपटने के लिए ये नई तकनीक बनाई
है। इससे प्लास्टिक के कूड़े को पेट्रोल और डीजल बनाने में सफलता मिलेगी।
इस तकनीक के माध्यम से जो पेट्रोल-डीजल बनेगा वह साधारण पेट्रोल-डीजल से
कहीं ज्यादा अच्छी क्वालिटी का होगा।
इस ग्रीन तकनीक में प्लास्टिक के कूड़े को उपयुक्त उत्प्रेरको से मिलाकर गैसोलीन, डीजल या फिर सुगंधित गैसों में बदला जाता है। जिससे एलपीजी भी प्राप्त होती है। वैसे तो देश मे पेट्रोल का मूल्य 70 से 80 रूपए प्रति लीटर है। लेकिन ग्रीन तकनीक से बनने वाले पेट्रोल का खर्च मात्र 30 से 40 रूपए प्रति लीटर आता है। जोकि वाहन धारकों के लिए एक बड़ी खुशी की बात है।
पेट्रोल और डीजल की ये तकनीक सिर्फ जर्मनी और अमेरिका के पास है
ये तकनीक अभी सिर्फ जर्मनी और अमेरिका के पास थी अब भारत के पास भी हो गई। इस प्रकार भारत ने जर्मन और अमेरिका की बराबरी करते हुए आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया। इन दोनों देशों मे अभी इस तकनीक पर काम ही चल रहा है। प्लास्टिक के कूड़े को पेट्रोल-डीजल मे परिवर्तित करने की तकनीक को ग्रीन तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक को भारत मे पहली बार देहासदून स्थित भारतीय पैट्रोलियम संस्थान के शोधकर्ताओ ने हासिल की है।इस ग्रीन तकनीक में प्लास्टिक के कूड़े को उपयुक्त उत्प्रेरको से मिलाकर गैसोलीन, डीजल या फिर सुगंधित गैसों में बदला जाता है। जिससे एलपीजी भी प्राप्त होती है। वैसे तो देश मे पेट्रोल का मूल्य 70 से 80 रूपए प्रति लीटर है। लेकिन ग्रीन तकनीक से बनने वाले पेट्रोल का खर्च मात्र 30 से 40 रूपए प्रति लीटर आता है। जोकि वाहन धारकों के लिए एक बड़ी खुशी की बात है।

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